जान ले ना कोई हाल-ऐ-दिल इस डर से...!
बेवजह मुस्कुराने की आदत सी है मुझे...!
यूं तो तेरे डर से नामुराद लौटा हूँ...!
किस्मत को आजमाने की आदत सी है मुझे ...!
मैं जानता हूँ की तू लौट कर ना आयेगा ...!
दिल को बहलाने की आदत सी है मुझे...!
चाँद ग़म न कर मैं भी तेरा साथी हूँ...!
के रात जागे रहने की आदत सी है मुझे...!
कभी तो वो भी सोचेंगे अच्छा नही हुआ ...!
खुश फ़हमी मैं जागने की आदत सी है मुझे...!
खुश फ़हमी मैं जागने की आदत सी है मुझे...!
(Swami Ji)
