जान कर भी वो मुझे जान नापाये०,
आज तक वो मुझे पहचान ना पाए,
ख़ुद ही कर ली बेवफाई हमने,
ताकि उन पर कोई इलज़ाम ना आए!!!
नाकाम सी कोशिश किया करते हैं,
हम हैं की उनसे प्यार किया करते हैं,
खुदा ने तक़दीर में एक टुटा तारा नही लिखा,
और हम हैं की चाँद की आरजू किया करते हैं !!!!
मिलना इतिफाक था बिछरना नसीब था
वो उतना ही दूर हो गया जितना क़रीब था
हम उसको देखने के लिए तरसते ही रहे
जिस शख्स की हथेली पे हमारा नसीब था
मेरे दिल की किताब को पढ़ना कभी,
सपनो में आके मुझ से मिलना कभी
मैंने दुनिया सजाई है तेरे लिए,
मेरी नज़रों की उम्मीद बनना कभी
बहुत दूर हैं सितारों से रोशन जहाँ,
जरा हम कदम बनके मेरे साथ चलना कभी
(Swami ji )
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